Sunday, June 9, 2019

शायद तुम्हे जाना था ....

दोस्तों इस दुनिया में हर चीज़ हर किसी को नहीं मिल सकती। इसलिए शायद भगवान्  ने हर किसी को अलग अलग खूबी से  नवाजा है। कुछ चीज़े नसीब में ही नहीं होती कम्बख्त इसलिए कुछ चीज़ पास आकर भी दूर चली जाती है। इसी से जुडी हुई पेश है आपके लिए यह कविता जिसका शीर्षक है। 
   
 

                              शायद तुम्हे जाना था ....

अलग अलग गलियारों में खिले थे दो फूल 
इत्तेफ़ाक़ से जब मिलना हुआ तो दोनों हो गए मशगूल 

शायद कायनात का यही इरादा था 
एक दूसरे से मिलने जुलने का वादा था 
अभी तो शुरुआत थी मिलन  की बेला को लाना था 
पर तुम नहीं आये शायद तुम्हे  जाना था.

पथरीली रास्तो से गुजरकर तुमसे मिलने आया था 
शायद उस समय अच्छे वक्त का साया था 
प्रेमराग की  मधुर बेला पर अविचल राग को आना था
पर तुम नहीं आये शायद तुम्हे जाना था 

याद है वो शाम जब तुम मेरी दीवानी थी 
उमड़ घुमड़ के बदरा भी उस दिन मस्तानी थी 

भीगे भीगे अल्फाज़ो में तुम्हे कुछ बताना था 
पर तुम नहीं आये शायद तुम्हे जाना था।


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