Friday, June 7, 2019

दर्द ज़िन्दगी का.

दर्द। दोस्तों आप सब के ज़िन्दगी में कोई न कोई दुःख तकलीफ या अन्य कोई समस्या तो होती होंगी। किसी के लिए कुछ समस्या छोटी होती है तो किसी के लिए यह बहुत बड़ी। हम किसी के तकलीफ को तभी समझ सकते है जब वह अपनी  हो। दुसरो की तकलीफ के लिए हम संवेदनाएं जरूर जता  सकते है पर उनका दुःख तो  वो ही  जानते  है। 
       क्या आपने कभी ये सोचा है जो दर्द माँ बाप को मिलती होगी  जब उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ दिया जाता है या जब किसी सैनिक के परिवार  को पता चलता है की उनके पुत्र को वीरगति प्राप्त हो गयी है। इन सभी दर्द को संजोकर आपके लिए एक कविता प्रस्तुत है। 

                         

                         दर्द जिंदगी का

 राह चल रहे मुसाफिर ने पूछा ये दर्द क्या होता है ,
ढाई अक्षर का शब्द है जिसे लगे उसे पता होता है ,
जिसको माँ बाप ने पाला है जिसे उन्होंने संभाला है ,
ठुकराकर जब वो जाते है तब उन पर जो कुछ होता है.
वही दर्द होता है ,वही दर्द होता है। 

जिसके इंतज़ार में राते  कटे नहीं कटती है ,
उस पत्नी से पूछो जो सैनिक पति के यादो में बसती है ,
वीरगति अर्जित हुआ ,जब उसका जनाजा होता है ,
अश्रुपूरित आँखों में तब दर्द होता है। 

नव माह जिसने तुम्हे अपने अंदर में बसाया है ,
तुम्हारे इंतज़ार में पल पल जिसने बिताया है ,
घनघोर पीड़ा के बाद  जब नवजात का जन्म होता है,
जन्म के होते ही जब वो दुनिया को खोता है,
तब ग़मों का झंकार जो उस माँ के रग -रग  में रोता है. 
वही दर्द होता है ,वही दर्द होता है। 

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