Thursday, May 30, 2019

नाकाम..

जिंदगी वीरान सी लगती  है, दिल हैरान सा लगता है .
मंजर को छूने  की चाह है  ,पर पता नहीं क्यूँ कुछ नाकाम सा लगता है . 

बुनियाद हिलती जा रही है, असफलता के अंगारों में .
सब्र टूटता जा रहा है, अश्क की बौछारों में. 
अपने है मेरे साथ में ,पर भी बेगान सा लगता है .
पता नही क्यूँ कुछ नाकाम सा लगता है...


सपनो की उचाईया छूने ,पंछी बन जाऊ सा लगता है. 
घनघोर  घटा मुश्किलों  की, मुझसे बहुत  कुछ कह देता है. 
साहस की लौ को पकड़कर, हिम्मत का पसीना बहता है .
अवसरों की झड़ी होती है, मंजिल दिखाई देता है .

कामयाबी के घर आकर भी, अब अंजान सा लगता है. 
पा लिया सब कुछ जिंदगी में ,
पर पता नहीं  क्यूँ कुछ नाकाम सा लगता है ....



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